आकाश बनर्जी ने जी न्यूज़, एबीपी और आजतक वालों के झूठ के ढोल की पोल खोलकर रख दी

नोटबंदी के ऐलान के बाद मीडिया से कई प्रकार की न्यूज़ देखने को मिल रही है जहाँ एक तरफ एक-आध मीडिया वाले नोटबंदी से होने वाले देश को नुक्सान और बुरी तरह से आम आदमी की परेशानियों को उजागर कर रहे है और सरकार के इस तानाशाही फैसले की पोल खोल रहे है तो वहीँ दूसरी ओर ऐसे भी मीडिया वाले है जिन्हें सिर्फ अपनी टीआरपी और उससे होने वाली कमाई का ध्यान रखते हुए फर्जी न्यूज़ दिखा रहे है। नोटबंदी के कारण देश के आम लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा है। मोदी सरकार ने एक ओर तो भ्रष्टाचार और कालाधन रोकने के लिए पांच सौ और एक हजार के नोटों पर बैन लगा दिया और वहीँ दूसरी ओर दो हजार का नोट जारी करके आम लोगों के लिए और ज्यादा समस्या पैदा कर दी। क्योंकि पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने की वजह से खुले पैसे आम आदमी को नहीं मिल पा रहे है।

अगर किसी भी तरह से बैंक से दो हजार का नोट मिल भी जाता है तो उससे कहीं ज्यादा परेशानियों का सामना करते हुए उसे खर्च करने में भी तकलीफों से गुजरना पड़ रहा है। क्योंकि भारत के बाजार में 86 फीसद पांच सौ और एक हजार के नोट की करेंसी चल रही थी। इसलिए बाजार में सौ रूपये के नोट कम होने की वजह से समस्या और ज्यादा बढ़ चुकी है। नोटबंदी के कारण लाखों मजदूर बेकार बैठ गए है और लघु उद्योग ठप्प हो चुके है। जिसके कारण आम आदमी का रोजगार छिन गया है और लाखों मजदूर बेरोजगार हो चुके है।

इसके अलावा मीडिया न्यूज़ वाले दो हजार के नोट को लेकर ऐसी-ऐसी खबरें दिखा रहे है जिसकों लेकर मीडिया द्वारा अफवाहे फैलाई जा रही है। नोटबंदी के बाद दो हजार के नोट को लेकर मीडिया द्वारा अफवाह फैलाई गई थी कि, इस नोट के अन्दर एक ऐसी चिप लगी हुई है जो नोटों के ढेर को पता लगा लेगी फिर चाहे वह नोट पाताल में भी क्यों न छिपे हुए हो। इस न्यूज़ को सबसे पहले तिहाड़ जेल की हवा खा चुके देशभक्त के नाम से मशहूर सुधीर चौधरी जी न्यूज़ के सम्पादक ने फैलाई थी। उन्होंने बताया था कि, दो हजार के नोट के अन्दर ऐसी चिप लगी हुई है जिसकी वजह से नोट कहीं भी छिपे हुए उन्हें आसानी से पता लगाया जा सकता है।

इस झूठ के ढोल की पोल न्यूज़ लांड्री के संपादक आकाश बनर्जी ने अपने ही अंदाज से खोलकर रख दी। उन्होंने बताया कि, किस तरीके से देश की मीडिया बेकार न्यूज़ को दिखाकर देश की जनता को बेवकूफ बना रही है जिसका कोई आधार भी नहीं है। इसके अलावा एबीपी न्यूज़ वालों ने एक खबर चलाई थी जिसमें बताया गया था कि, एक ऐसी एप्लीकेशन बनाई गई है जिससे नोट को स्कैन करके यह पता लगाया जा सकता है कि, कोनसा नोट असली है और कौनसा नोट नकली। लेकिन अगर हकीक़त में देखा जाए तो मोदी कीनोट एप्लीकेशन में साफ़ तौर पर शुरू में ही देखा जा सकता है कि, उन्होंने एप्लीकेशन डाउनलोड करने से पहले ही यह बता रखा है कि, यह सिर्फ एंटरटेनमेंट परपज के लिए बनाई गई है जिसे लोगों ने मीडिया से फैलाई गई न्यूज़ की सहायता से सच मान लिया। लेकिन आकाश बनर्जी ने इस की पूरी पोल खोलकर देशवासियों के सामने रख दी।

loading...

Leave your reply