इंसानियत का दुश्मन बनता जा रहा है नोटबंदी का फैसला: देखें विडियो

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नोटबंदी के चलते अब तक एक महीने के भीतर सैंकड़ों लोगों ने अपनी जान दे दी है तो किसी ने जान देने तक की नाकाम कोशिश भी कर चुके है। ये खबर पढ़कर और देखकर शायद आपकी आँखें नम हो सकती है लेकिन नोटबंदी का दर्द बयां कर रही ये रिपोर्ट गरीबों और मजदूरों का दर्द बता रही है। नोटबंदी के चलते आम आदमी और मजदूर तबके के लोगों के पास अब खाने तक के पैसे भी नहीं बचे है। सबसे बड़ी दुविधा यह बन चुकी है कि, किस तरह वो कमाए और किस तरह लाइन में खड़े रहकर वापस नोट को एक्सचेंज करवाएं।

जहाँ सरकार देश की इकॉनमी को कैशलेस करने की बात कर रही है आपको बता दे कि, देश की आधे से ज्यादा करीब 70 फीसद तक इस देश में लोग गरीब है। और ज्यादातर लोग ऐसे भी है जो अपना नाम तक नहीं लिखना जानते है वह कैसे पेटीएम जैसी सुविधा समझ पाएंगे। मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये से हमारे सामने ऐसी खबरें सामने आ रही है जिसे देखकर आँखों से आंसू ही जारी हो जाये, लेकिन इनका दर्द कोई समझने वाला नहीं है।

NDTV की इस ख़ास रिपोर्ट के जरिये से आप देख सकते है कि, जब एक माँ अपने बच्चों को तीन दिन से खाना नहीं खिला पाई तो उसने अपनी जान लेने तक की कोशिश की और अपने आपको जलाने की कोशिश की। जिसके बाद उनका शरीर 40 फीसद से ज्यादा जल गया। नोटबंदी के कारण मासूम बच्चे भूखे मर रहे है लेकिन इन पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है।

NDTV की इस खबर में आप देख सकते है कि, चार छोटे-छोटे मासूम बच्चों को अभी यह पता भी नहीं है कि, इनकी माँ जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। यह वाकया है अलीगढ का और यहाँ पर एक महिला ने खुद को इसलिए आग लगा ली क्योंकि चार बच्चों को तीन दिन से एक माँ खाना नहीं दे पाई इसलिए वह यह दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसने खुद को जलाकर ख़ुदकुशी करने की कोशिश की।

इन बच्चों ने बताया कि, “माँ को नए नोट नहीं मिले तो वह अपने बच्चों को खाना तक नहीं खिला पाई और इसी से परेशान और हताश होकर रजिया ने अपने आप पर मिट्टी का तेल छिड़कर जान देने की कोशिश की।” बच्चों ने बताया कि, “हमें बहुत भूख लग रही तो पापा जो पैसे लेकर आये तो माँ उन पैसों को बदलवाने भी गई लेकिन तीन-चार दिनों से चेंज नहीं होने के कारण और बच्चों ने कहा कि, हमें भूख लग रही है तो अम्मी ने अपने आपको आग लगा ली।”

वहीँ दूसरी ओर राजकोट में एक पिता ने अपनी जान दे भी दी, क्योंकि 9 दिसम्बर को उनकी बेटी की शादी होने वाली थी। नोटबंदी से पहले तक तो रिश्तेदारों और दोस्तों ने उसकी मदद के लिए वादा किया हुआ था। लकिन नोटबंदी के चलते पैसों की व्यवस्था नहीं होने के कारण सभी ने मना कर दिया। इसलिए एक गरीब के पास अपनी बेटी की शादी के लिए पैसे नहीं होने के कारण उसने अपनी जान दे दी। गरीबों के लिए नोटबंदी एक श्राप जैसा बन गया है।

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