पचास दिन बाद भी मोदी के वाराणसी में मजदूर मर रहे है भूखे

नोटबंदी के पचास दिन पूरे हो चुके है लेकिन अभी भी वैसी की वैसी ही समस्या बनी हुई है। अभी भी एटीएम में कैश नहीं आ रहा है और बैंकों में भी लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही है। मोदी जी ने देशवासियों से पचास दिन मांगे थे और अब तो वह भी पूरे हो चुके है। पचास दिन के बाद मोदी जी ने देश को संबोधित किया था उनमें नोटबंदी से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी गई। ऐसा लग रहा था कि, वित्त मंत्री की जगह मोदी जी ने ही आने वाले बजट की घोषणा कर दी हो। पचास दिन बाद कितना काला धन जमा हुआ? इसके बारें में मोदी जी ने कोई चर्चा नहीं की और न ही खुद को चौराहे पर बुलाने के बारें में चर्चा की।

पचास दिन के बाद मोदी जी का भाषण सुनने के बाद लालूप्रसाद जी ने मोदी जी के भाषण पर तंज कसते हुए कहा कि, अगर नोटबंदी से एक भी उपलब्धि हासिल हो जाती तो उसकी कामयाबी का ढोल खूब पीटते। लेकिन नोटबंदी से देश को अँधेरे की तरफ ढकेल दिया गया है और बिना सोचे समझे लिया गया इस फैसले ने देश को बर्बाद करके रख दिया। इसके कारण मजदूरों की हालत सबसे ज्यादा खराब हो चुकी है। नोटबंदी के बाद धन्नासेठों की दबंगई भी देखने को मिली है और वह ऐसे है कि, जब मजदूर इनके पास काम करने के लिए जाते है तो वह कहते है कि, काम तो बहुत है करने के लिए लेकिन मजदूरी के पैसे नहीं है देने के लिए।

इस विडियो में देख सकते है आप एबीपी की ख़ास रिपोर्ट में, नोटबंदी पर सबसे बड़ा कवरेज की रिपोर्ट में। यह रिपोर्ट भी वहां की है जहाँ से मोदी जी ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। इस वाराणसी शहर में भी ऐसी हालत है कि, मजदूरों को काम नहीं मिलने की वजह से उनके आँखों से आंसू जारी है। नोटबंदी का सबसे ज्यादा प्रभाव ही गरीब मजदूरों पर ही देखने को मिला है। उनके पास जो कुछ थोड़ा जो भी बचाकर रखा हुआ है वह लंबी-लंबी कतारों के कारण उसे निकाल नहीं पा रहे है। गरीबों के परिवार भूखे मरने को मजबूर है लेकिन इसका जवाब भी मोदी सरकार के पास नहीं है।

उत्तर प्रदेश के बनारस में ये हाल है जहाँ से लोकसभा चुनाव जीता था, वहां का ये हाल हो रखा है। अब इस साल दो-तीन महीनों के भीतर उत्तर प्रदेश के चुनाव होने जा रहे है और इसके लिए अभी से ही घमासान शुरू हो चुका है। लेकिन नोटबंदी के फैसले ने बीजेपी के पैर तोड़ दिए है और इस वजह से यूपी में भाजपा को बड़ी हार का सामना भी करना पड़ सकता है। क्योंकि पैसे नहीं होने की वजह से लोग हताश और परेशान हो चुके है। नेता तो स्टेज से भाषण देकर चले जाते है लेकिन उन पर क्या बीत रही है कोई नेता घर-घर जाकर नहीं देखता है। लेकिन नोटबंदी के मार ने मजदूरों और छोटे व्यापारियों की कमर तोड़कर रख दी है।

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