हर बात पर राष्ट्रवाद का चोला पहनाने वाले पत्रकारों की पोल खोली रवीश कुमार ने

रवीश कुमार रिपोर्टिंग के साथ ऐसी बातें करते है जो सीधे दिल में उतर जाती है। ऐसे ही राजस्थान के जयपुर में हुए प्रोग्राम में रवीश कुमार ने बताया कि, इतिहास उठाकर देख लीजिये आज तक जितने भी दंगे हुए है किसी को किसी भी तरह का कोई फायदा नहीं हुआ है। इन दंगो में सिर्फ लाशे ही गिनी जाती है। वो आसान है प्रक्रिया पांच-छ: लोगों को साधने के जरिये, तो समझिएगा की एक-एक एंकर राष्ट्रवाद का प्रतीक बनता चला जा रहा है। राष्ट्रवाद न होकर जैसे गाय हो गई है जैसे गो-रक्षक हो गए है जो जहाँ-तहां लोगों को पीटते चले जा रहे है। वही दूसरा मसला हो गया है राष्ट्रवाद। साम्प्रदायिकता के नाम के जो चेहरे है जो भेड़े लड़ाई जा रही है। इनसे सिर्फ एक बात को लेकर सतर्क हो जाइये। रवीश कुमार ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि, कमियां हम में भी है कमियां आप में भी है।

लेकिन उनका कोई भी एक वैधानिक कारण मौजूद नहीं है कि, उन कमियों को लेकर एक-दुसरे के खिलाफ तलवारे निकाल ले। रवीश कुमार ने बताया कि, जो महाबोर लोग है जो कुर्सी पर बैठे-बैठे बोर हो चुके है अब वो राष्ट्रवाद की बस ले जा रहे है जिसका अंतिम स्टेशन हिन्दू-बनाम मुस्लिम है। रवीश कुमार ने इस प्रोग्राम में लोगों को चेतावनी देते हुए बताया कि, अगर आपको टीवी देखकर नफरत ही सीखनी है और आपने यही तय कर लिया है तो रवीश कुमार ने बताया कि, मैं आपके हजार रूपये बचा देता हूँ। आप अख़बार और टीवी देखना बंद कर दो, आपके हजार रूपये बच जायेंगे और वो हजार-हजार रूपये ड्राफ्ट से आप मेरे घर भिजवा दीजिये।

रवीश कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि, इतिहास में आजतक किसी को भी किसी दंगे से कोई फायदा नहीं पहुंचा है लेकिन जो लोग भाषण देते है उनकी जिंदगी तो जरुर बदल जाती है। इसलिए टीवी पर चलने वाली चीजों को आपको समझना जरुरी हो गया है। रवीश कुमार ने ये भी बताया कि, आपके देश में अचानक से ऐसी कोई घटना नहीं घटित हुयी है जिसकी वजह से आपको रोजाना राष्ट्रवाद पर चर्चा करना जरुरी हो। रवीश कुमार ने पत्रकारिता का भी आलोचना करते हुए यह कह डाला की कभी भी रवीश कुमार मत बनिए। क्योंकि आजकल पत्रकारिता सीखने के लिए इतनी भारी-भरकम फीस ली जा रही है जिन्हें हम अपने खाते में देखने के लिए 10-12 साल तक बीत जाते है। ये डिबेट टीवी जनमत को मारने की एक सिर्फ प्रक्रिया ही है। रवीश कुमार ने बताया कि, पत्रकारिता में जमींदारी सिस्टम का मैं विरोध चाहता हूँ, इतने बड़े देश में सभी पत्रकारों के अलग-अलग सवालों को भी देखना चाहिए।

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