अडानी ग्रुप को मोदी सरकार ने सौंपा इतने हजार करोड़ का ठे!का, देश की सुरक्षा को मोदी सरकार…

एक बार फिर सरकार सं!देह के घेरे में आ गई, इस बार मुद्दा अडाणी ग्रुप को पनडुब्बी ठे!का देने के मा!मले पर नौसेना व रक्षा मंत्रालय आमने-सा!मने हैं। 45000 करोड़ के इस ठे!के में 75-आई प्रोजेक्ट के लिए अडाणी डिफेंस व हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) की तरफ से आवेदन किया गया था।

इसे नौसेना ने रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह के ज्वाइंट वेंचर्स को मौका देना चाहिए। यह प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया के तहत बड़ा प्रोजेक्ट है।

इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सबसे बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट के लिए पांच आवेदन सा!मने आए थे जिसमें से नेवी की ‘एम्पॉवर्ड कमेटी’ ने दो को चुना है। इसमें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और लारसन एंड टूब्रो शामिल हैं। इन दोनों को ही सबमरीन बनाने में अच्छा अनुभव है। ‘एम्पॉवर्ड कमेटी’ के सुझाव को दरकि!नार करते हुए सरकार अडाणी जेवी को भी 75-आई प्रोजक्ट के सौदे के लिए चुन रही है।

दोनों के बीच वि!वाद की यही वजह है। डिपॉर्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन ने सुझाव दिया है कि एचएसएल-अडाणी ज्वॉइंट वेंचर को भी शामिल किया जाना चाहिए। बता दें कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड डिपॉर्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के अधीन है। वहीं सरकार के इस प्रोजक्ट के लिए अडाणी जेवी को चुनने पर कांग्रेस ज!मकर हम!लवार है। कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार देश की सुरक्षा के साथ खिलवा!ड़ कर रही है।

एक खबर के अनुसार सबसे बड़े इस प्रोजेक्ट के तहत 5 आवेदन आए थे। इसमें नौसेना की एंपावर्ड कमेटी ने दो को चुना। इसमें मझगांव डॉक शिपबिलडर्स लिमिटेड और लारसन एंड ट्रूबो  शामिल है। दोनों को सबमरीन के बारे में पता है। एंपावर्ड कमेटी के सुझाव पर सरकान ने इस प्रोजेक्ट के लिए अडाणी ग्रुप को चुना है। इस तरह सरकार और नौसेना के बीच वि!वाद की यही वजह है।

कांग्रेस ने भी अडाणी ग्रुप को चुनने पर सरकार पर हम!ला बोला है। मोदी सरकार पर सुरक्षा के साथ खिलवा!ड़ करने का आरो!प लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरेजवाला ने कहा है कि सरकार अपने दोस्तों को पिछे दरवाजे से मदद कर रही है। अडाणी ग्रुप को भले यह प्रोजेक्ट मिला है, लेकिन उसे इसका अनुभव नहीं है।