कोरोना केस में तबलीगी जमात को लेकर केजरीवाल पर उठे सवाल, कोर्ट में याचिका दायर

दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया गया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल  और उनके प्रशासन को कुछ कोरोना वयारस से संक्रमित मामलों को ‘तबलीगी जमात’ या ‘मस्जिद मरकज’ के रूप में वर्गीकृत करने से रोका जाए।

क्योंकि यह धार्मिक तौर पर चिन्हित करने के बराबर है। दिल्ली में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के करीब 17 मामले सामने आए हैं और अब तक 38 लोगों किसके कारण मौत हो चुकी है।

एक वकील द्वारा याचिका में कहा गया है कि तबलीगी के कार्यक्रम के बाद से केजरीवाल ने अपने विभिन्न ट्वीट में संक्रमण के कई मामलों को ‘मस्जिद मरकज’ नाम के शीर्षक के तहत जानबूझ कर रखा है। याचिकाकर्ता वकील कश्यप ने दावा किया है कि कोरोना वायरस के मामलों को इस तरह पेश करने से सांप्रदायिक बैर पनप रहा है।

धर्म के खिलाफ नफरत का माहौल

वकील ने ये भी कहा है कि इसके कारण एक धार्मिक समुदाय विशेष के प्रति नफरत का माहौल बना है। इसमें कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी अपने उत्तर पूर्वी हिस्से में दंगे का दंश झेल चुकी है और जब दिल्ली में माहौल पहले से ही संवेदनशील और तनावपूर्ण हैं, तो ऐसे में कोरोना के मामलो को इस तरह वर्गीकृत करने से हालात और खराब होंगे।

दिल्ली हेल्थ बुलेटिन से हटा तबलीगी जमात का कॉलम

जानकारी के लिए आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस (की जानकारी देने वाले अपने हेल्थ बुलेटिन  में निजामुद्दीन मरकज मस्जिद लिखना बंद कर दिया है। इसकी जगह अब ‘स्पेशल ऑपरेशन’ लिखा जा रहा है।

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने इस पर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद सरकार ने ये फैसला लिया है। आयोग ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि दिल्ली के कोरोना मामलों में मरकज वालों का आंकड़ा अलग क्यों लिखा जा रहा है।

‘एक खास समुदाय पर हमला’

आयोग का मानना है कि इससे एक खास समुदाय पर लगातार हमले हो रहे हैं। आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर इसका जवाब मांगा है। अल्पसंख्यक आयोग ने सवाल उठाए कि अधिकारिक आंकड़ों में मरकज के मरीजों के लिए अलग कॉलम क्यों रखा गया है। उन्होंने कहा कि संप्रदाय के आधार पर अलग किए गए कॉलम को तुरंत हटाई जाए।