क्या चीन कर रहा है भारत पर हमले की तैयारी? प्राइम टाइम में रवीश कुमार की ख़ास रिपोर्ट

पत्रकार रवीश कुमार ने चीन द्वारा भारत पर हमले की तैयारी को लेकर विशेष रिपोर्ट तैयार की गई है। रवीश कुमार का मानना है की चीन पूरी तैयारी में है भारत पर हमला करने की। ऐसे में मोदी के हाथों बिके हुए न्यूज़ चैनल व अखबार वाले इसकी खबर तक नहीं चला रहे है। वहीं, पीएम मोदी भी इस मामले पर चुप्पी साधे बैठे हैं। आइए आपको पढ़ते पत्रकार पत्रकार रविश कुमार की चीन द्वारा भारत हमले पर विशेष रिपोर्ट।

क्या आपने भी महसूस किया है कि जब भी पाकिस्तान की बात आती है हमारा मीडिया का एक बड़ा हिस्सा युद्ध का उन्माद फैलाने लगता है, भारत के संयम को ललकारने लगता है, लेकिन जब चीन की बात आती है तो वही मीडिया और उसके एंकरों की भाषा में रक्षा, रणनीति की शब्दावली तो है लेकिन मार दो, फोड़ दो, दिखा दो टाइप के सड़क छाप विश्लेषण नहीं हैं। नेता, मंत्री या प्रवक्ता भी शालीन नज़र आ रहे हैं।

चीन के बहाने कम से कम टीवी पर चर्चा के तेवर से लग रहा है कि अब भी बहुत कुछ नहीं बिगड़ा है। हमारे एंकर और चैनल पूरी तरह से शालीनता से चर्चा करना नहीं भूले हैं। पाकिस्तान को लेकर भारतीय मीडिया ने कवरेज का जो पैमाना कायम किया है वो पैमाना लगता है चीन के संदर्भ में आउट ऑफ सिलेबस हो गया है।

हाल ही में प्रवीण सॉहनी और ग़ज़ाला वहाब की एक किताब पढ़ रहा था ड्रैगन ऑन आवर डोरस्टेप. इस किताब से एक चीनी खेल का प्रसंग मिला। इसे गो कहते हैं। पत्रकार प्रवीण को चीनी सेना पीएलए के अधिकारी ने इस खेल के बारे में बताया था कि हम शतरंज नहीं पसंद करते हैं, गो ही पसंद करते हैं। आज की दुनिया में अपनी क्षमता को छिपाना मुश्किल हो गया है। यह खेल हमें सिखाता है कि चाल चलते वक्त किसी भी तरह इरादे का पता न चले।

सब पता चल जाए मगर किसी तरह मंशा का पता न चले। यह खेल चीन में दो ढाई हज़ार साल से खेला जा रहा है। इस खेल में जो सबसे पहले सफेद या काली गोटी से बोर्ड को भर देता है वही विजयी माना जाता है। प्रवीण सॉहनी ने लिखा है कि इस बातचीत के अगले दिन जब वे बाज़ार में घूम रहे थे तो हर जगह गो जिसे चीनी भाषा में वेई की कहते हैं, बिकते देखा। शतरंज नहीं। उन्हें एक और सेना अधिकारी ने बताया था कि चीन तभी लड़ता है जब उसका हित प्रभावित होता है।

डोकलाम क्षेत्र में 18 जून को जो हुआ है उसके बाद से कुछ नया नहीं हुआ है। लेकिन अलग-अलग स्तर पर रोज़ बयान ज़रूर आ रहे हैं। कभी बीजिंग से तो कभी दिल्ली के चीनी दूतावास से। 6 जुलाई को दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के राजनीतिक काउंसलर ली या ने एक वीडियो बयान जारी किया है। बयान अग्रेज़ी में है। इसका अनुवाद मैं पढ़ रहा हूं।
इस वीडियो बयान में ली या कह रहे हैं कि पहले के विवादों के समय भारतीय अधिकारी भारत के भीतर जन भावना का हवाला देते हुए चीन से आग्रह करते रहे हैं कि वह अपनी सेना को पीछे हटा ले।

इसलिए चीनी कूटनीति के लिए यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम सीधे भारतीय जनता से ही बात करें। भारत में चीनी दूतावास के अधिकारी बहुत ज़्यादा मीडिया में नहीं आते हैं। 18 जून को भारत चीन सीमा से लगे सिक्किम सेक्टर के पास दोनों मुल्कों की टुकड़ियों में हाथापाई जैसी हुई। 1890 में ब्रिटेन और चीन के बीच तिब्बत और सिक्किम को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसके तहत ब्रिटेन ने चीन के लिए इस सेक्टर पर अपनी दावेदारी छोड़ दी थी। भारत दावा कर रहा है कि डोकलाम भूटान का है।

भारत अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। जहां तक मेरी जानकारी है, भारत का यह दावा ग़लत है। हमारे पास प्रमाण हैं कि डोकलाम चीन का है. डोकलाम, चीनी सीमा के पास रहने वालों के लिए पारंपरिक रूप से चारागाह का क्षेत्र रहा है। शी जांग स्वायत्त क्षेत्र के आर्काइव में भूटानी चरवाहों के दिए ग्रास टैक्स यानी घास कर की रसीद भी है। यह किसी भी संप्रभु राष्ट्र को मंज़ूर नहीं होगा। समाधान यही है कि भारत अपनी टुकड़ी हटा ले। बिना किसी शर्त के और वो भी जल्दी. इसके बग़ैर भारत और चीन के बीच कोई भी मानीख़ेज़ बातचीत नहीं हो सकती है।

इससे पहले बीजिंग से भी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसी तरह का बयान दिया, उससे पहले दिल्ली स्थित चीन के राजदूत ने भी यही बात दोहराते हुए कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन किया है। चीन लगातार अपना बयान दे रहा है और प्रोपेगैंडा कर रहा है। अभी तक भारत की तरफ एक ही औपचारिक बयान आया है। भारत का मानना है कि जो कहना था कह दिया।

रक्षा मंत्री और सेनाध्यक्ष का भी एक ही बार बयान आया। इस बीच गुरुवार सुबह पीटीआई के हवाले से ख़बर आई कि जी-20 के लिए जर्मनी पहुंच रहे भारत के प्रधानमंत्री और चीन के राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय वार्ता नहीं होगी। चीन ने बातचीत से मना कर दिया है क्योंकि बातचीत का माहौल नहीं है। पीटीआई ने यह ख़बर चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से यह जारी की थी।

 

https://youtu.be/CbmpiKGSZzY

इस ख़बर के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कहा कि भारत की द्विपक्षीय बैठक अर्जेंटीना, कनाडा, इटली, जापान, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और वियतनाम के साथ तय है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स नेताओं की बैठक में हिस्सा लेंगे, जिसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

चीन चाहता क्या है, उसका इरादा उस गो खेल की तरह है जिसका सिद्धांत ही इस पर टिका है कि कुछ हो जाए, इरादे का पता नहीं चलना चाहिए। क्या चीन भारत के खिलाफ विवाद से प्रोपेगैंडा करना चाहता है. वो पाकिस्तान के लिए यह सब कर रहा है या अपने लिए। भूटान तो भारत के साथ है मगर चीन भूटान के लिए क्यों रो रहा है।