PM मोदी के साथ मीटिंग से पहले कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों ने लिया ये बड़ा फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्रियों की मुलाकात से पहले कांग्रेस ने गुरुवार (23 अप्रैल, 2020) को कहा कि मौजूदा स्वरूप का लॉकडाउन अस्थिर है और इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।

मुख्य विपक्षी दल ने अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार पर कोई ठोस कदम नहीं उठाने का भी आरोप लगाया। मीटिंग में केंद्र सरकार से कहा गया कि तीन मई को खत्म हो रहे लॉकडाउन के आखिरी दस दिनों में डिटेल एग्जिट पॉलिसी बनाए

कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में तैयार की गई पार्टी के रुख को सोमवार को पीएम के साथ बातचीत के दौरान उसके मुख्यमंत्रियों द्वारा व्यक्त किए जाने की उम्मीद है। बैठक के दौरान कांग्रेस सरकार से यह भी आग्रह किया कि राज्यों को अपनी योजनाओं को खुद बनाने की अनुमति दी जाए।

राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने CWC में इस बात पर जोर दिया कि केंद्र को गैर नॉन हॉटस्पॉट जोन में आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने की अनुमति देनी चाहिए। मीटिंग में मुख्मंत्री अशोक गहलोत (राजस्थान), अमरिंदर सिंह (पंजाब), भूपेश बघेल (छत्तीसगढ़) और पुदुचेरी के सीएम वी नारायणसामी मौजूद थे, जिन्होंने अपने राज्यों में वित्ती संकट और टेस्टिंग किट की कमी के बारे में चिंता जाहिर की।

वहीं बैठक में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा कोरोना संकट के समय भी ‘नफरत का वायरस’ फैलाने और सांप्रदायिक बंटवारे की राजनीति में लगी हुई है। सोनिया की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद पार्टी ने सरकार से यह आग्रह भी किया कि लॉकडाउन (बंद) के समय का उपयोग इस संकट से निपटने की कार्ययोजना एवं भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए किया जाए।

सीडब्ल्यूसी की बैठक में पारित प्रस्ताव में गरीबों के खातों में 7500 रुपए भेजने, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, कोरोना वायरस संक्रमण के उपचार और रोकथाम, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने और लोगों को आजीविका का साधन उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

बैठक के दौरान अपने संबोधन में सोनिया ने आरोप लगाया कि जब देश में कोरोना वायरस के खिलाफ सभी को एकजुट होने की जरूरत है तो भाजपा सांप्रदायिक पूर्वाग्रह और नफरत का वायरस फैलाने में लगी हुई है।