कैंपों में बंद उइगर मुसलमानों पर चीनी बर्ब’रता, जीते-जी निकाले जा रहे किड’नी और फे’फड़े

कोरोना का कहर झेल रहे देश लगातार चीन पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने बीमारी की संक्रामकता छिपाई. यहां तक कि WHO पर भी चीन की मदद का आरोप लग रहा है. इस बीच ये नई बात सामने आई है कि चीन अपने यहां की माइनोरिटी यानी उइगर मुसलमानों के साथ इस मुश्किल वक्त में भी अमा’नवीय रवैया अपना रहा है.

कई इंटरनेशनल रिपोर्ट्स में कयास लगे हैं कि कोरोना के गंभी’र मरीज, जिनके ऑर्गन फेल हो जाते हैं, उनके शरीर में ट्रांसप्लांट करने के लिए जबरन उइगर मुस्लिमों के अं’ग निकाले जा रहे हैं.

पहले भी लगा है आरोप

वैसे चीन में इस समुदाय के अवैध ऑ’र्गन रिमू’वल की बात पहले भी उठती रही है. पिछले साल जिनेवा में UN Human Rights Council की मीटिंग के दौरान ये बात उठी. इस दौरान चीन में काम कर रही एक स्वयंसेवी संस्था चाइना ट्रिब्यूनल ने आरोप लगाया कि चीन उइगर मुस्लिमों के दमन के लिए ये नया तरीका अपना रहा है.

ट्रिब्यूनल के मुताबिक चीन ने डेढ़ लाख से ज्यादा मुस्लिमों को बंदी बना रखा है और जरूरत पड़ने पर उनके हार्ट, किडनी, लंग्स और यहां तक कि स्किन तक निका’ल लेता है ताकि किसी चीनी की जा’न बचाई जा सके. इसके अलावा एक और धार्मिक समुदाय Falun Gong के भी सदस्यों के अंग जबर्दस्ती निकाले जा रहे हैं.

बंदी बनाए गए मुस्लिमों के अं’ग निकाले जा रहे

यूएन की मीटिंग में चाइना ट्रिब्यूनल के प्रतिनिधि हामिद सबी ने बताया कि चीन में ये फोर्स्ड ऑर्गन हार्वेस्टिंग कई सालों से चल रही है. बयान के साथ कई सबूत भी रखे गए. इसमें बताया गया है कि कैसे चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने उइगर मुस्लिमों को बंदी बना रखा है और उन्हें मौ’त की सजा सुनाने के बाद सबसे पहले उनके ऑ’र्गन निकाल लिए जाते हैं.

यहां तक कि दूसरे माइनोरिटी समुदाय Falun Gong के सदस्यों के लिए सरकार का आदेश है कि उन्हें जिं’दा रखते हुए ही उनके शरीर से सारे ऑ’र्गन निकाल लिए जाएं और उनकी ऊंचे दामों पर बिक्री की जाए. बिजनेस इनसाइडर में आई रिपोर्ट के मुताबिक यही वजह है कि चीन के अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए काफी कम इंतजार करना होता है, जबकि आमतौर पर ये टाइम सभी देशों में काफी ज्यादा है.

चीन ने किया था रिफॉर्म का दावा

पहले भी चीन पर डिटेंशन कैंपों में रह रहे कैदियों के ऑ’र्गन जबर्दस्ती निका’लने के आ’रोप लगते रहे हैं. लेकिन साल 2015 में चीन में बताया कि उनके यहां अब ये प्रैक्टिस बंद हो चुकी है. अपने पक्ष में तर्क देते हुए चीन ने कहा कि उनके यहां वालंटरी ऑ’र्गन डोनेशन पर काफी जोर है इसलिए ऑर्गन की कमी नहीं होती है.

हालांकि साइंस जर्नल BMC Medical Ethics के मुताबिक ऐसा बिल्कुल नहीं है और चीन में वही प्रैक्टिस 2010 से चली आ रही है.

साल 2010 में People’s Republic of China ने अपने यहां जेल में बंद कैदियों के ऑ’र्गन लेने की बजाए एक नया नियम बनाया. इसके तहत उन्हीं लोगों के ऑ’र्गन लिए जाएंगे जो ब्रेन डेड घोषित कर दिए गए हों या लंबे समय से कोमा में हों.

ऐसे में परिवार की इच्छा से ही मरीज के अं’ग लिए जाएंगे. चार सालों बाद मानवाधिकार संस्थाओं के हल्ले के बाद एक बार फिर से चीन की सरकार ने घोषणा की कि हॉस्पिटल बेस्ड डोनर ही ऑर्गन दे सकेंगे.

हालांकि इसके बाद भी चीन में माइनोरिटी ग्रुप से जबर्दस्ती ऑर्गन लेने की परंपरा बंद नहीं हुई. चाइना ट्रिब्यूनल ने कैदियों के परिवारों से इंटरव्यू में दिखाया है कि कैसे बेहद बर्बर तरीके से जिंदा इंसान से सारे ऑर्ग’न निकालकर उसे म’रने के लिए छोड़ दिया जाता है.

यही वजह है कि चीन में ऑर्गन ट्रांसप्लांट इंडस्ट्री काफी फल-फूल रही है. फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी सालाना कमाई 1 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा है.

कोरोना मरीजों के लिए की जा रही जबर्दस्ती

अब कोरोना वायरस के दौर में चीन की हरकतें एक बार फिर से मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर हैं. जैसे कोरोना वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों के ऑर्गन फेल हो रहे हैं. ऐसे में उन्हें नए ऑ’र्गन देने के लिए इन्हीं उइगर मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है. माना जा रहा है कि डिटेंशन कैंप में रह रहे इन कैदियों के लिए चीनी सरकार का kill-on-demand आदेश आ चुका है.

यानी जब भी अंगों की जरूरत पड़े, उन्हें मा’र दिया जाए और उनके अंग ले लिए जाएं. चीन में ऑर्गन हार्वेस्टिंग पर काम रही संस्था के मुताबिक एक मैचिंग फेफड़े के लिए जब पूरी दुनिया के देशों में लोग लंबा इंतजार करते हैं, वहां चीन में इसकी मांग कुछ ही दिनों में पूरी हो जाती है.

संदेह जगाने वाले आंकड़े

साल 2016 में 6 दिनों के भीतर ही चीन में एकाएक 88,3000 लोगों ने ऑर्गन डोनेशन के फॉर्म भरे. इसपर खुद Red Cross Society of China ने भी हैरत जताते हुए चीन में फोर्स्ड ऑर्गन ट्रांसप्लांट का संदेह जताया था.

अवैध तरीके से माइनोरिटी के अं’ग निकालने की बात को इस डाटा से भी बल मिलता है कि चीन में ऑर्गन डोनेशन की दर काफी कम है. Journal of Biomedical Research के अनुसार यहां हर 20 लाख की आबादी पर 1 व्यक्ति वालंटरी ऑर्गन डोनेशन करता है, जबकि यूएस में ये आंकड़ा 45% है. यानी वालंटरी डोनेशन के हिसाब से देखें तो चीन में डिमांड और सप्लाई में फर्क काफी ज्यादा है.

इसके बाद भी यहां तुरत-फुरत ऑ’र्गन मिल जाते हैं. इसकी वजह यही है कि चीन में अवैध ऑर्ग’न डोनेशन का काम काफी बढ़ा हुआ है. China Tribunal का मानना है कि पिछले 20 सालों से चीन में ये अवैध काम चल रहा है और कोरोना के वक्त इसमें बढ़ोत्तरी हुई है.

चीन के जिनजिएंग शहर में रखे गए उइगर मुस्लिमों का जबर्दस्ती ब्लड टेस्ट करवाया जा रहा है ताकि उन्हें live organ-matching database में रखा जा सके. मानवाधिकार संस्थाओं के मुताबिक पिछले कुछ ही महीनों में यहां सारे उइगर मुस्लिमों, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं, का ब्लड और डीएनए टेस्ट हुआ.

चीन का कहना है कि उसके यहां हर साल केवल 10000 ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मामले होते हैं. वहीं चीन के केवल तीन ही बड़े अस्पतालों के डाटा बताते हैं कि वहां हर साल 60000 से लेकर 1 लाख तक ऑर्गन ट्रांसप्लांट हो रहे हैं. चीन का ये भी कहना है कि उसने केवल 100 अस्पतालों को अंग प्रत्या’रोपण के लिए अधिकृत कर रखा है, वहीं 712 अस्पतालों ने अपने यहां ऑर्गन ट्रांसप्लांट की बात स्वीकारी.

साभार: न्यूज़18